बुजुर्ग हमेसा प्याज फोड़कर ही क्यों खाते थे। रह जाओगे

हमारे बुजुर्गों के पास चाकू, तलबार, हसिया सब कुछ था लेकिन फिर भी वो जब भी प्याज खाते थे तो उसे हाँथ से फोड़कर ही खाते थे। अपने गाँव मे भी देखा होगा वहाँ अभी भी लोग प्याज को फोड़कर ही खाते हैं।

क्यों खाना चाहिए फोड़कर प्याज

प्याज के काटने पर जितनी तेजी से उस में पाये जाने वाले पदार्थ रासायनिक क्रिया करते हैं उतना अन्य खाधपदार्थ नहीं कर पाते। प्याज में सल्फर की मात्रा अधिक पायी जाती है।
तथा रासायनिक प्रक्रिया का जो अंतिम उत्पाद बनता है उसे सल्फ्युरिक अम्ल (H2SO4), कहते हैं। यह अम्ल एक्वा रिजिया के बाद पाया जाने वाला सबसे शक्तिशाली अम्ल होता है। जो कि सोने (Gold) व प्लेटिनम (Platinum) को छोड़कर किसी भी अन्य धातु के साथ क्रिया कर उसे नष्ट कर सकता है।

आसान भाषा मे यदि हम प्याज को किसी धातु - लोहा, स्टील, तांबा, अलुमिनियम या कोई अन्य धातु से बने औजार से काटते हैं। तो वह धातु से बने औजार प्याज के साथ रासायनिक क्रिया करके उसे जहरीला बना देते हैं। इस लिये प्याज को हमेशा फोड़कर या सेव अमरूद की तरह दाँत से काटकर खाना चाहिए।

दूसरी बात प्याज की हर परत पर ऊपर व नीचे एक झिल्ली होती है यो कि अपाच्य होती है। वह झिल्ली फोड़णे से ही अलग हो पाती है, काटणे पर वह साथ में कट जाती है। इसलिए प्याज को किसी भी धातु से काटना उचित नहीं है।

यह सल्फर युक्त पदार्थ गंठे (प्याज) की ऊपरी परतों में सबसे ज्यादा होता है तथा बीच में नाम मात्र का होता है। नीदरलैंड की एक यूनिवर्सिटी की खोज के अनुसार गंठे (प्याज) के बीच में पाये जाने वाला quercetin बहुत ही प्रभावी ऐंटिऑक्सिडेंट है। जो कि जवानी को बरकरार रखता है। तथा विटामिन ई का मुख्य स्त्रोत है।

वैसे तो यह पदार्थ चाय व सेब में भी पाया जाता है लेकिन गंठे (प्याज) के बीच में पाया जाने वाला पदार्थ चाय के पदार्थ से दो गुना व सेब में पाये जाने वाले इसी पदार्थ से तीन गुना जल्दी हजम होता है। 100 ग्राम गंठे (प्याज) में यह 22.40 से 51.82 मिलीग्राम तक होता है।

Bern विश्वविद्यालय स्वीट्जरलैंड ने चूहों को प्रति दिन एक ग्राम प्याज खिलाया तो उन की हड्डी 17% तक मजबूत हो गई। प्याज का बीच वाला हिस्सा पेट का अल्सर व सभी प्रकार के हृदय रोगों को ठीक करती है।


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