ऐसा योद्धा जिसने औरंगजेब को नहीं घुसने दिया अपने क्षेत्र में newshank.com

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maharaj chhatrasal kaun the-छत्रसाल  का जन्म कब हुआ था-newshank.com


Newshank.com, बुंदेलखंड Bundelkhand की धरती वीरों की भूमि कही जाती है। इसी धरती पर पिता चम्पतराय champtray और माता सारन्धा Sarandha के पुत्र वीर छत्रसाल का जन्म हुआ। महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal  के जन्म के बारे में ये कथा प्रचलित है - जब वह अपनी माँ सारन्धा Sarandha के उदर में थे तो इनके माता पिता को मुगल सेना ने चारोंओर से घेर लिया था। छत्रसाल के पिता चम्पतराय champtray बहुत ही बहादुर और पराक्रमी राजा थे। वहीं इनकी माँ सारन्धा Sarandha भी एक क्षत्राणी वीरांगना थी।



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बुंदेलखंड Bundelkhand में मुगलों द्वारा घेरे जाने पर इन दोनों ही योद्धाओं ने उनके हौशले पस्त कर दिए। चम्पतराय champtray बहुत घायल हो चुके थे उन्होंने रानी सारन्धा Sarandha को अपने बालक की रक्षा करते हुए कुछ बचे हुए सैनिकों के साथ वहाँ से जाने को कहा लेकिन रानी सारन्धा Sarandha ने जाने से मना कर दिया। उसके बाद राजा चम्पतराय champtray ने रानी सारन्धा Sarandha को अपनी गोद मे उठा कर उस ऊंची पहाड़ी से छलाँग लगा दी। लेकिन आश्चर्यजनक घटना घटित हुई दोनों ही बिल्कुल सुरक्षित दूसरी पहाड़ी पर उतर गए। आज भी वहाँ के लोग उस बुंदेलखंड Bundelkhand  की पहाड़ी को मोर की पहाड़ी के नाम से जानते हैं।

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छत्रसाल  का जन्म कब हुआ था ? Chhatrasal Ka Janm -

रानी सारन्धा Sarandha ने एक पहाड़ की कंदरा में अपने पुत्र को जन्म दिया जन्म देने के बाद रानी सारन्धा Sarandha और राजा चम्पतराय champtray बचे हुए मुगलों से युद्ध करते करते वीरगति को प्राप्त हुए। जब राजा चम्पतराय champtray के बचे हुए कुछ सैनिक उस कंदरा के पास पहुँचे तो उन्होंने वहां उस बालक के ऊपर एक दो फन के नाग को छाया किये हुए देखा। वहीं पास में एक स्वर्ण मुहर पड़ी हुई थी जिस पर लिखा था प्राणनाथ वह सैनिक उस बालक को उनकी ननिहाल लेकर आये जहां उनका नाम छत्रसाल रखा। महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal को पालन पोषण उनकी ननिहाल में ही हुआ।




क्यों नहीं आया औरंगजेब Aurangzeb कभी बुंदेलखंड - 

महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal को छापा-मार युद्ध मे महारत हासिल थी। उन्होंने लगभग 52 युद्ध किये लेकिन कभी भी पराजित नहीं हुए। औरंगजेब Aurangzeb महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal को पर्वती चूहा कहा करता था। उसने अपने कई सैनिक महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal से युद्ध करने को भेजे लेकिन कभी भी औरंगजेब जीता नहीं। वह स्वयं कभी भी बुंदेलखंड Bundelkhand नहीं गया उसे डर था। कि उसके दिल्ली से जाते ही कहीं वीर शिवाजी महाराज Veer Shivaji Maharaj और महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal मिलकर दिल्ली को न जीत लें। महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal से मिली कई हार के बाद भी औरंगजेब कभी बुंदेलखंड Bundelkhand नहीं गया। 

इस तरह मारा गया था औरंगजेब Aurangzeb Kaise Mara - 

महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal के गुरु स्वामी प्राणनाथ ने उन्हें एक खंजर देकर कहा था जब भी कभी औरंगजेब से उनका सामना हो तो वह इस खंजर से केवल औरंगजेब Aurangzeb को घायल कर दे। महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal ने वैसा ही किया औरंगजेब Aurangzeb को उस खंजर से मिला घाव कभी भी ठीक नहीं हुआ। वह अंत समय तक तड़प तड़प के मरा।

हमारे देश में महाराजा छत्रसाल Maharaja Chhatrasal और वीर शिवाजी महाराज Veer Shivaji Maharaj  जैसे और भी बहुत से योद्धा हुए हैं। लेकिन यह इस देश और समाज का दुर्भाग्य है। कि हमे आज भी इनकी वीरता से दूर रखा गया है। और वाहर से आये हुए लुटेरों को इतिहास में महान बताया गया है।

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