कैसे मारा था महाराजा छत्रशाल ने औरंगजेब को - Mahamati-Prannath-Maharaja-Chhatrasal

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भारत पर अनेक लुटेरों ने आक्रमण करके इसे लूटा है देश के बहुत से योद्धा इस मातृभूमि को आज़ाद कराते कराते वलिदान होते रहे।

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भारत मे सनातन परंपरा पर अनेक विदेशी राजाओं ने कुठाराघात किया। उन्हीं में से एक था औरंगजेब जो कि सनातन धर्म के लिए सबसे खतरनाक साबित हुआ। औरंगजेब के सबसे ज्यादा उत्पात हिन्दू धर्म के लिए  हैं।  उसने अनेकों मंदिर तोड़ कर वहां से मिली मूर्तियों को मस्जिदों की सीढ़ियों में लगवा दिया।

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औरंगजेब के समय महाराष्ट्र में छत्रपति शिवाजी तथा बुंदेलखंड में महाराजा छत्रशाल थे। इन दोनों ही योद्धाओं ने औरंगजेब का सम्पूर्ण भारत पर शासन करने का सपना कभी पूरा नहीं होने दिया। 

बुंदेलखंड महाराज छत्रशाल की छत्रछाया में अपने आप को सुरक्षित महसूस किये हुए था। छत्रशाल ने छोटे बड़े लगभग 52 युद्ध किये। इतिहासकारों के मुताबिक महाराजा छत्रशाल ने कभी भी पराजय का मुख नहीं देखा वो हमेशा विजयी रहे। 


इस विजय के पीछे आशीर्वाद था उनके गुरु महाप्रभु स्वामी प्राणनाथ जी का। कहा जाता है स्वामी प्राणनाथ अलौकिक शक्तियों के स्वामी थे। उनके पास बहुत सी विद्याएं थी। परमात्मा श्री कृष्ण को इष्टदेव मानने बाले स्वामी प्राणनाथ जी हमेशा अपने प्रिय शिष्य महाराजा छत्रशाल को अपने वचनों से प्रभावित किया करते थे। 

स्वामी प्राणनाथ ने ही राजा छत्रशाल को महाराज के रूप में बुंदेलखंड का महाराजा घोषित किया था। स्वामी प्राणनाथ ने महाराजा छत्रशाल को एक ख़ंजर दिया था जिसे राजा छत्रसाल ने युद्ध के मैदान में औरंगजेब को मार दिया था। औरंगजेब को उस खंजर का थोड़ा ही भाग चुभा था जिसके परिणाम स्वरूप औरंगजेब धीरे धीरे शक्तिहीन होकर मारा था। 

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